जब बस नहीं चली तो चीनी सामान बिकता कैसे है?
बस चलाने की अनुमति मांगने पर जेल हुई और चीनी सामान बिकता रहेगा। बिक्री और आयात नहीं रोकेंगे खरीदने वाले से अपील करेंगे। चीन का सामान नहीं खरीदने की भक्तों की अपील का क्या मतलब है? हममें से कौन चीन जाता है झालर या मोबाइल खरीदने। सब तो यहीं मिलता है। और लाइसेंस इजाजत कौन देता है? देश में घुसता कैसे है? चौकीदार क्या करता है? कौन है ऐसी चीजें आने देने वाला। उसे ही बोल दो। सीमा पर चीनी सामान रोक देगा, हम कहां से खरीद पाएंगे। चोर चौकीदार ना कोरोनो रोक पाएगा ना चीनी समान और हम सबूत मांग नहीं सकते।
जो भारत में मिल रहा है वह भारतीय है। किसी भारतीय कारोबारी का पैसा लगा है उसमें। वह चीनी कैसे हो गया। अगर चीनी होता तो इतने सारे चौकीदारों के रहते भारत में खुलेआम बिकता क्यों है? खरीद कर लाने वाले, बेचने वाले और उससे कमाने वाले को मना करो हमारे एक पीस खरीदने नहीं खरीदने से चीन का क्या बिगड़ेगा। बिगड़ेगा तो उसका जो पैसे देकर खरीद लाया है। हिम्मत है, इच्छा है, भगवान का समर्थन है तो आयात रोको। आयात करने वाले को मना करो। ना देश में चीनी माल आएगा ना हम खरीद पाएंगे। वैसे भी, सरकार सबसे कम वाले को टेंडर देने के नाम पर मूर्ति बनवाए या सुरंग और हम महंगा खरीदें? सस्ता छोड़कर?
अभी हाल ही में तो घटिया पीपीई किट चीन से खरीदा गया था। ठीक है कि लौटा दिया गया पर ऑर्डर क्यों दिया गया? रेल बस नहीं चली तो लोग पैदल गए ना? मरने वाले मरे ना। बस तो नहीं चली। मुकदमा हुआ ऊपर से। महीने भर बाद जमानत मिली और भक्त समझते हैं कि हम चीनी सामान जबरदस्ती खरीद लेंगे। बस चलाने की अनुमति मांगने पर जेल और चीनी सामान लोग ऐसे ही बेच ले रहे हैं?
लेखक : संजय कुमार सिंह
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