सरकार ने सभी लोगों के लिए कम मूल्यों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत, जन औषधि केंद्र (जेएके) के नाम से जाने जाने वाले विशेष केंद्र देश भर में खोले गए हैं, जहां ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50 से 80 प्रतिशत कम मूल्यों पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। 28 फरवरी, 2026 तक इस योजना के अंतर्गत देश भर में कुल 18,646 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश के खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में कुल 38 जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं, जिनमें कटनी जिले में 9, पन्ना जिले में 4 और छतरपुर जिले में 25 जन औषधि केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों की स्थापना और संचालन भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (पीएमबीआई) से प्रारंभिक अनुमोदन प्राप्त करने और राज्य औषधि लाइसेंसिंग प्राधिकरणों से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने के बाद किया जाता है।
पिछले वित्तीय वर्ष यानी वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देशभर में कुल 4142 जन औषधि केंद्र खोले गए और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर कुल 2022.47 करोड़ रुपये की बिक्री हुई। पिछले वित्तीय वर्ष में स्टॉक की कमी से संबंधित कोई सूचना दर्ज नहीं की गई।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत उत्पाद सूची में 2,110 दवाएं और 315 शल्य चिकित्सा सामग्री, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं, जो हृदय रोग, कैंसर रोधी, मधुमेह रोधी, संक्रमण रोधी, एलर्जी रोधी और पाचन संबंधी दवाएं और पोषक तत्व जैसे सभी प्रमुख चिकित्सीय समूहों को कवर करते हैं। प्रयोगशाला अभिकर्मकों (रीएजेंट) और टीकों को छोड़कर, राष्ट्रीय आवश्यक औषधियों की सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं इस उत्पाद सूची का हिस्सा है।
वर्तमान में, फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया के उत्पाद संग्रह में पुरानी बीमारियों और गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के रोगियों के लिए 850 से अधिक दवाएं उपलब्ध हैं। टीबी की दवाओं के लिए, टीबी मुक्त भारत अभियान वर्ष 2021 में शुरू किया गया था और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एक अलग अभियान के अंतर्गत सभी टीबी रोगियों का पंजीकरण किया गया था, जिसका उद्देश्य मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराना था। फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया ने 100 से अधिक जन औषधि केंद्र का सर्वेक्षण किया और कम मांग और उपर्युक्त अभियान के अंतर्गत मुफ्त उपलब्धता के कारण टीबी रोधी दवाओं को शामिल न करने का निर्णय लिया।
जन औषधि केंद्र में दवाओं की सुगमता और उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, निम्नलिखित उपाय लागू किए गए हैं:
- देश भर में वर्तमान में पांच गोदामों और 41 वितरकों से युक्त एक संपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली स्थापित है।
- सितंबर 2024 से, जन औषधि केंद्रों द्वारा आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसमें उत्पाद सूची में सबसे अधिक बिकने वाली 100 दवाएं और बाजार में तेजी से बिकने वाली 100 दवाएं शामिल हैं। जन औषधि केंद्र मालिकों को इन दवाओं के उनके द्वारा रखे गए स्टॉक के आधार पर मासिक प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्रता होगी।
- इसके अतिरिक्त, आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, योजना को लागू करने वाली संस्था (फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया) द्वारा 400 तेजी से बिकने वाले उत्पादों की नियमित निगरानी की जाती है और इनकी मांग का निरंतर पूर्वानुमान लगाया जाता है। साथ ही, खरीद प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए पूर्वानुमान पद्धति को डिजिटल करने के कदम उठाए गए हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम है, जो सतत और स्थिर आय प्रदान करते हुए विभिन्न स्तरों पर रोजगार सृजित करती है। योजना के दायरे को बढ़ाने के लिए सरकार ने मार्च 2027 के अंत तक देश भर में खोले गए जनऔषधि केंद्रो की कुल संख्या को बढ़ाकर 25 हजार करने का लक्ष्य रखा है।
सरकार ने जन औषधि केंद्र खोलने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, समितियों, ट्रस्टों, फर्मों, निजी कंपनियों आदि से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। कोई भी व्यक्ति जिसके पास डी. फार्मा या बी. फार्मा की योग्यता है, चाहे वह स्वयं हो या कोई भी व्यक्ति या संगठन जिसने संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से दवा लाइसेंस प्राप्त करने के लिए फार्मासिस्ट के रूप में ऐसी योग्यता वाले व्यक्ति को नियुक्त किया हो, जन औषधि केंद्र खोलने के लिए पात्र है। मध्य प्रदेश राज्य के सभी जिलों सहित देश के सभी जिलों से वेबसाइट www.janaushadhi.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं ।

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