लॉकडाउन में भीड़ होने के चलते विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के लिए परमिशन की अनिवार्यता को प्रशासन ने समाप्त कर दिया है।
अब बिना परमिशन के ही विवाह कार्यक्रम कर सकेंगे, लेकिन इसमें दोनों पक्षों से सिर्फ 30 लोगों के ही शामिल होने की बाध्यता अब भी बरकरार है।
कोरोना संक्रमण दौर में लॉकडाउन के दौरान भीड़भाड़ से बचने के लिए विवाह समेत अन्य पारिवारिक और मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रशासन से परमिशन की अनिवार्य था।
परमिशन की झंझट और आवागमन पर लगी रोक के कारण विवाह के लगन के मुख्य माह अप्रैल, मई और जून माह में जिले में निर्धारित हुई हजारों शादियां स्थगित हो गई थीं। लॉकडाउन में ढील के बाद भी बिना परमिशन हो रही शादियों के दौरान लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर सता रहा था।
प्रशासन ने अब विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के लिए परमिशन की अनिवार्यता खत्म कर दी है, लेकिन मानक से अधिक भीड़ पर रोक है। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रमों के लिए परमिशन की जरूरत नहीं है, लेकिन इसमें 30 लोगों से अधिक शामिल नहीं होंगे, मानक का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सादगी के साथ होंगी शादियां
पूर्व में जहां धूमधाम से होने वाले विवाह समारोहों में वर और वधू पक्ष से सैकड़ों लोग शामिल होते थे, वहीं अब सादगी के साथ होने वाले विवाह समारोह में दोनों पक्षों से सिर्फ 30 लोग ही शामिल हो सकेंगे।
साथ ही अब बिना भीड़भाड़ के होने वाले शादियों में दोनों पक्षों के करीबी रिश्तेदार ही शामिल हो सकेंगे।
रिपोर्ट शिवम् मिश्र सिद्धार्थ नगर
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