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Saturday, 20 June 2020

पप्पू .. !! क्या सच में पप्पू है ??

पप्पू .. !! क्या सच में ?? 

पप्पू याने बेवकूफ, जिसे सामान्य ज्ञान न हो, जो बोलने मे अटके, जो गलत बातें कहे, जो साथी सहयोगी से सलाह ले , जिसे लोग धोखा देकर चले जाते है। इसके मुकाबले वो महामानव जिसे सारा ज्ञान है, जो धड़ धड़ बोलता है, जिसे किसी की सलाह नही चाहिए और जो खुद दूसरों को धोखा देने मे सक्षम है। वो जो एंटी पप्पू है, वो जो स्मार्ट है। 

दरअसल राहुल वो बैकग्राउंड है, जिससे मोदी उभर कर आते हैं। अच्छा फोटोग्राफर जानता है उजले कपड़े पहने आदमी की छवि ज्यादा उजली दिखाने के लिए, पीछे पीछे स्याह पर्दा होना जरूरी है। छह साल पहले जब राहुल के कपड़ो पर सत्ता की धूल थी, मोदी स्वतः झक सफेद नजर आ रहे थे। 

पर आज जब मोदीजी पर मदान्धता, औऱ अक्षमता की धूल स्याह होती जा रही है, वह खुद ही राहुल का बैकग्राउंड बन उन्हें उभारने को अभिशप्त हैं। यह नियति का अजब खेल है क्योकि मोदीजी ने अपना एडवर्सरी खुद चुना था। 

दरअसल 2014 उन 2019 में राहुल या कांग्रेस ने कभी नही कहा की राहुल उनके प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं। यह सम्भव था कि जीतने पर सोनिया की तरह राहुल अपना मनमोहन लाते। उन्हें कांग्रेस का पीएम कैंडिडेट करने वाले कौन थे- स्वयं मोदी जी। छह साल महज 50 सीट वाली कांग्रेस को जितने (कु)प्रचार का ऑक्सीजन बीजेपी ने दिया, उतना शायद कांग्रेस की अपनी गतिविधियों से न मिला।। मोदी नीत भाजपा ने कच्चा प्रतिद्वंद्वी समझ उन्हें रिलेवेंट बनाये रखा है। 

अब जब राहुल के नए वीडियोज, इंटरव्यूज, ट्वीट , बयान आ रहे है, दुनिया के प्रतिष्ठित इकॉनमिस्ट औऱ बौद्धिकों से उनकी खुली औऱ सेम मेंटल लेवल पर बातचीत दिख रही है, पप्पू पेंट झड़ रहा है। ये भारत देश के लिए बेहद अच्छा सगुन है। कांग्रेस (या बीजेपी) का मरना भारत के लिए अशुभ है। देश को पैन इंडिया विकल्प देने वाले दल का जीना जरूरी है। 

हालांकि राहुल के जितने वीडियोज मैंने पहले भी देखे, बातें सुनी .. इंटेलेक्ट के लेवल पर उनकी कोई समस्या नही महसूस हुई। जहां अटकते थे, शब्द खोजते थे, वह अंग्रेजी में सोचने और हिंदी में बोलने का नतीजा था। कट वीडियोज, दुष्प्रचार, और उनकी अपनी पार्टी की जमीनी कमजोरी ने इस पप्पू जुमले को फैलाया था। 

मगर अब, पॉलिटिक्स के झंझटो के प्रति उनकी रिलकटेंस खत्म हो चुकी है। प्रेसिडेंशियल किस्म के होते जा रहे इलेक्शन में अपनी छवि के महत्व को समझते हुए खुलकर बातें कह रहे है। हिंदी बेहतर हुई है, अंग्रेजी शानदार थी ही, अब सुने भी जा रहे है। नैतिक ताकत खो चुकी सरकार के सामने राहुल, नैतिकता की ताकत लेकर खड़े है। ये बडी बात है। मगर कमजोरी अभी भी है, दूरी लम्बी है। 

आने वाला वक्त, और यह देश राहुल को अपनी सोच और योजनाओं को अमली जामा पहनाने का मौका दे। उनके जन्मदिन की विलम्बित शुभकामनायें। और एक सलाह भी.. 
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एक साइडकिक रखें। जो जरूरत के मुताबिक सुपरलेटिव डिग्री की कमीनगी का गुण रखता हो। जो दक्षिण को स्वीप कर सके, जो उत्तर को तोड़ सके। जो गुंडा भी हो, फिरौतीबाज भी। कमी नही है ऐसे टैलेंट की। खोजिए.. बहुत मिलेंगे। बेस्ट खोजिए, और फ्री हैंड दीजिये। 

शजर पे फल पक चुके है। पत्थर उछालने वाला चाहिए।

लेखक : मनीष सिंह जी की वाल से साभार

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