आपदा को अवसर में बदलते भारतीयों से विश्वासघात की कथा
लॉकडाउन के दौरान गरीबों को सरकारों से इतना खाना मिल रहा था कि उनके पेट खराब हो गए। इन लोगों का इलाज करने में जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए तो उन्होंने कहा कि उन्हें घर जाना है। सत्ता में बैठे लोग तुरन्त खुद जहाज और रेल वगैरह लेकर आ गए कि चलो आपको घर छोड़ दें।
पर गरीब मजदूर बोले कि नहीं। खाना पचाने के लिए उनको हजार- दो हजार किमी पैदल चलना है। सरकारों और नेताओं ने उनकी बात मानी और उनके साथ चलने के लिए पुलिस तैनात की। पुलिस का काम था उनकी रक्षा और बीच-बीच मे उनपर डंडे बरसा कर चेक करना कि उनके अंग प्रत्यंग ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं।
रास्ते भर गरीबों के ठहरने-सोने की उत्तम व्यवस्था की गई। रेल की पटरियों पर। ओलंपिक टल गये तो तैयारी का समय मिल गया। बच्चों से कहा गया कि वो अपने माँ-बाप को रिक्शे या साइकिल पर बिठा कर प्रैक्टिस करें। आज हालत ये है वाकिंग से लेकर साइक्लिंग तक के सारे पदक हमारे होंगे।
थाली, ताली बजा कर देश की जनता ने अपच के शिकार इन गरीबों का हौसला बढ़ाया। हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए। दुनिया ने कोरोना से लड़ना छोड़ हमारी तारीफें करना शुरु कर दिया। दुनिया भर में हमारा डंका बजने लगा। दुनिया ने कहा कोरोना को छोड़ो और भारत को विश्व गुरु का दर्जा दो अभी।
हमें विश्वगुरु का दर्जा मिलने ही वाला था कि एक एन्टी नेशनल, नासमझ, मोदी हेटर, ने एक सूदूर गांव जाकर झूठ-मूठ की खबर लिख दी। इस झूठ से दुनिया भर में भारत की इतनी मेहनत से बनाई गई छवि खराब हो गयी और हमारा विश्व गुरु का दर्जा टल गया।
इस अक्षम्य अपराध के लिए उसे वैसे तो फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए पर दयालु सरकार ने महज एफआईआर करके Scroll की सुप्रिया शर्मा को छोड़ दिया है। देखें अब ऐसा माहौल दोबारा कब बनता है और भारत विश्व गुरु कब बनता है। इस बीच आप भी सावधान रहें व झूठी खबरों से बचें।
लेखक : आलोक राय की वाले से साभार।
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